बड़ौत । सरकारी अस्पतालों में इस कदर अंधेरगर्दी मची हुई है कि मरीज तो उपचार कराने के लिए जाते हैं, लेकिन समय से पहले चिकित्सक अस्पताल छोड़ देते हैं। ऐसे में मरीज व्यवस्था को कोसते हुए बाहर निकल जाते हैं। यह हाल तो तब है जबकि तीन दिन पहले ही डीएम ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था और सीएमओ से लेकर चिकित्सकों तक को व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए थे, लेकिन उसके बाद भी अस्पतालों में व्यवस्था नहीं सुधर रही है। एक महिला चिकित्सक अपने कक्ष में मौजूद थी, जबकि दूसरे चिकित्सक अपने-अपने कक्षों से नदारद थे और मरीज अस्पताल में मौजूद थे। बावली गांव से आयी उषा ने बताया कि वह हार्ट से संबंधित दिक्कत है, लेकिन चिकित्सक अस्पताल में नहीं है। बावली के ही विनोद ने बताया कि वह भी एक्सरे कराने आए थे, लेकिन पर्चा बनाने के लिए चिकित्सक ही नहीं मिले। दोनों उपचार के बिना ही घर लौट गए। अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक चार चिकित्सक हिडन नदी किनारे गांवों में कैंप लगाने गए थे और उनकी गैर उपस्थिति में एक चिकित्सक की अस्पताल में ड्यूटी लगाई थी, लेकिन वह भी अपने कक्ष में नहीं थे। छपरौली सीएचसी के चिकित्सक भी बड़ौत सीएचसी की राह पर ही है। दवाई का काउंटर खुला था, लेकिन अधीक्षक का कमरा बंद था। यहां चिकित्सक मौजूद नहीं थे। फार्मासिस्ट वीरेंद्र कुमार कमरे में दवा वितरण कर रहे थे। अस्पताल में अधीक्षक डॉ. रोबिन के अलावा डॉ. बिजेंद्र सिंह, डॉ. चक्रेश गोयल, डॉ. अरुण कुमार तैनात हैं, लेकिन डॉ अरुण कुमार को छोड़ कोई नहीं मिला। अकेले उन्होंने ही 140 मरीज देखे। शबगा से शिमला देवी आठ किमी दूर से दवाई लेने के लिए आयी थी, लेकिन चिकित्सक न होने से परेशान दिखीं। कस्बा निवासी प्रमोद कुमार कुत्ता काटने का इंजेक्शन लगवाने के लिए आए थे, लेकिन बिना उपचार के वापस लौट गए। छपरौली और बड़ौत सीएचसी में तैनात चिकित्सक दूसरे स्थान पर ड्यूटी करने गए होंगे, इसलिए वहां नहीं मिले होंगे। ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि निर्धारित समय तक चिकित्सक अस्पताल में मरीजों को देखे।
सरकारी अस्पतालों में अंधेरगर्दी, डीएम साहब सुधार करो